मूंगफली के माध्यम से भ्रष्टाचार पर कविता


स्कूल में बच्चो को एक दाने की मूंगफलियां बाटी जा रही थी
यह बात मेरी समझ में नहीं आ रही थी
मेने शिक्षक से कहा की ये मूंगफलियां जो बच्चो बटवाई है
बताएँगे आप कहा से मंगवाई है
क्या इतनी पैदावार घट गयी इस ज़माने की
की पैदा होने लगयी मूंगफलियां केवल एक दाने की
तब शिक्षक ने मेरे प्रशन का किया समाधान,बोले श्रीमान
कैसे बताऊ आपको, इस देश में बढ़ते हुए पाप को
यह मूंगफली, जब केंद्र से चली, तो पुरे चार दाने की थी
इसका एक दाना हमारे बड़े साहब खा गए
दूसरा दाना छात्र साहब पचा गए
जब दो दाने दो अफसर की ताड़ में अटक गए
तोह मौका पाकर तीसरा दाना हेड मास्टर साहब गटक गए
तोह इस तरह की व्यवस्था चल रही आज देश में सरकारी ख़ज़ाने की
ऊपर से मूंगफलियां तोह आती हैं पुरे चार दाने की
मगर भ्रस्टाचार की आंधी में बह जाती है
जनता तक आते आते एक दाने की रह जाती है ॥

1 टिप्पणी:

  1. bhratachaari to jaal bhu jayenge ye padkar... iss kavita ko m apne website m dalna chahta hun.. taaki auron tak ye panhuche... http://www.kagajkalam.com/mungfali/..


    sir, ak suggestion bhi hai... aapka kavita ka address kafi.. bada hai.. isliye kafi logon tak ye nhi pahunchta hai... permalink setting m jaake isse shahi kijiye...

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