बस तू भीतर से हारा ना हो | Inspirational Poem


बस तू भीतर से हारा ना हो 

ऐसा कोई मनुष्य नहीं,
जो दुखो का मारा ना हो..
खुशियाँ तुझे ज़रूर मिलेंगी, 
बस तू भीतर से हारा ना हो ।

तू बन जाना औरों का रहबर,
जब  तेरा कोई सहारा ना हो..
उठा लेना पतवार स्वयं की, 
जब लगे पास किनारा ना हो । 

ऐसा कोई मनुष्य नहीं,
जो दुखो का मारा ना हो... 
खुशियाँ तुझे ज़रूर मिलेगी, 
बस तू भीतर से हारा ना हो ।

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